चीन भौचक्का, अमेरिका ने भी जताई हैरानी,भारत के इस कदम से
अमेरिका, चीन और ब्रिटेन अभी तक कोरोना महामारी का टीके का ट्रायल ही कर रहे हैं किसी ने कहा है कि जुलाई में टीका बना सकते हैं तो किसी ने सितंबर तो किसी ने इस साल के अंत तक वैक्सीन मार्केट में उतारने का ऐलान किया है। इन सब को पीछे छोड़ते हुए भारत के आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने वैक्सीन बनाने का ऐलान कर दिया है। ऐसा बताया जाता है कि भारत का वैक्सीन सबसे पहले मार्केट में आ जायेगा। आईसीएमआर और बायोटेक ने इस बारे में एक एग्रीमेंट भी कर लिया है। आईसीएमआर के इसी ऐलान से चीन भौचक्का है।
ध्यान रहे दुनियाभर में कोरोना की दवा खोजने के प्रयास जारी हैं। भारत में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भारत बायोटेक इंटरनैशनल (बीबीआईएल) से हाथ मिलाया है।
दोनों संस्थाएं मिलकर कोरोना की स्वदेशी दवा या वैक्सीन तैयार कर रही हैं। इस समझौते के बाद भारत ने कोरोना वैक्सीन खोजने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। सबकुछ सही रहा तो भारत दुनिया में सबसे पहले वैक्सीन विकसित कर लेगा और उसे दूसरे देशों की मदद नहीं लेनी पड़ेगी।
कोरोना की वैक्सीन विकसित करने के लिए नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे में अलग किए गए वायरस स्ट्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। आईसीएमआर की ओर जारी बयान में बताया गया है कि एनआईवी में अलग किए गए वायरस स्ट्रेन को सफलतापूर्वक बीबीआईएल के लिए भेज दिया गया है। अब वैक्सीन तैयार करने पर काम चल रहा है।
आईसीएमआर की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'दोनों सहयोगियों के बीच वैक्सीन डिवेलपमेंट को लेकर काम शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया में आईसीएमआर-एनआईवी की ओर से बीबीआईएल को लगातार सपोर्ट दिया जाता रहेगा।
इस समझौते के बारे में भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्ण एला ने कहा, 'हमें इस बात पर गर्व है कि हम पूरे देश के लिए जरूरी इस प्रॉजेक्ट का हिस्सा हैं और आईसीएमआर और एनआईवी के साथ काम कर रहे हैं। हम इसे सफल बनाने और कोरोना के खिलाफ लड़ने में अपना पूरा योगदान देंगे।'
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